पानी ने लौटाई खुशहाली
लेखक: मनीष वैद्यबालौदा लक्खा गाँव को अब जलतीर्थ कहा जाता है। इस साल इलाके में बहुत कम बारिश हुई है। 45 डिग्री पारे के साथ चिलचिलाती धूप में भी गाँव के करीब 90 फीसदी खेतों में हरियाली देखकर मन को सुकून...
View Articleआदिवासियों ने खुद खोजा अपना पानी
Author: मनीष वैद्य जल दिवस की सार्थकता इसी में निहित है कि हम अपने पारम्परिक जल संसाधनों को सहेज सकें तथा प्रकृति की अनमोल नेमत बारिश के पानी को धरती की कोख तक पहुँचाने के लिये प्रयास कर सकें। अपढ़ और...
View Articleरंग लाई भेलडुंग के ग्रामीणों की मेहनत
Source: राष्ट्रीय सहारा, 23 मार्च 2018 सप्ताह भर पहले सोशल मीडिया के माध्यम से जब सेना में कार्यरत स्थानीय निवासी धर्मेंद्र जुगलान ने गाँव में पानी की किल्लत का समाचार पढ़ा तो वे स्वयं अवकाश लेकर गाँव...
View Articleमौर्यकालीन तकनीक से मगध बना पानीदार
Author: सुभाष पाठक Source: हिन्दुस्तान टाइम्स, 4 जनवरी 2018 भगीरथ प्रयास का परिणाम बेहतरीन रहा। इससे जमुने-दसईं पईन के आसपास बसे 150 गाँव व बरकी नहर के आसपास बसे 250 गाँवों के खेतों के लिये सिंचाई...
View Articleहरियाली और पानी लौटने से हरा-भरा हुआ मानर मल्ला गाँव
Author: नमिता आज मानर मल्ला गाँव खूबसूरत घने जंगल से घिर चुका है। गाँव के चार बड़े जलस्रोत भी रिचार्ज हो चुके हैं। अब यहाँ पानी की कोई किल्लत नहीं रही है। गाँव में सिर्फ जल संरक्षण के लिये काम नहीं...
View Articleतालाब सुधारा तो पटरी पर लौटी जिन्दगी
लेखक: मनीष वैद्यतालाब को गहरा करते हुए इसकी गाद वाली काली मिट्टी ट्रैक्टरों में भरकर ले जाने की पंचायत ने अनुमति दे दी। देखते-ही-देखते जून के पहले हफ्ते तक गाँव के लोगों ने यहाँ से करीब चार हजार ट्रॉली...
View Articleपानी और हरियाली से हरा-भरा गाँव
Author: श्रीपद्रे Source: द वाटर कैचर्स, निम्बी बुक्स प्रकाशन, 2017 कई महीने तक खोजबीन करने और तरह-तरह के उपायों पर विचार करने के बाद लक्ष्मण सिंह ने चौका बनाने का विचार सामने रखा। यह गाँव के वातावरण...
View Articleपानी के लिये महिलाओं ने चीरा पहाड़ का सीना
Author: राधाकिशन शर्मा Source: दैनिक जागरण, 26 दिसम्बर 2017 महिलाओं की दृढ़ इच्छा शक्ति के आगे पहाड़ भी नतमस्तक हो उठा। एक हजार फीट की ऊँचाई पर चढ़कर महिलाओं ने पहाड़ की छाती को चीरना शुरू किया। डेढ़...
View Articleपाँच साल से पूरा परिवार पी रहा बरसात का पानी
Author: संदीप हुड़्डा Source: राजस्थान पत्रिका, 22 सितम्बर 2017 संरक्षण के लिये एक ऐसा परिवार है जो पिछले पाँच साल से केवल बरसात का पानी उपयोग में ले रहा है। परिवार के सातों सदस्यों का मानना है कि...
View Articleसामुदायिक प्रयासों से किया कुलगाड़ में नौले को पुनर्जीवित
Author: डाॅ. मुकेश बोरा गाँव के उत्तर में एक नौला है, जिसे गाँववासी पनेरा नौला कहते हैं। यह पानी के स्रोत के साथ ग्रामीणों के लिये परम्परा एवं संस्कृति का केन्द्र है। यहाँ के निवासियों की मान्यता है...
View Articleवाटर हार्वेस्टिंग सहेजें बारिश की बूँदें (Rainwater Harvesting Essay In Hindi)
Author: पूनम नेगी Source: राष्ट्रीय सहारा (संडे उमंग), 23 जुलाई, 2017 दुनिया की बड़ी आबादी आज भी पीने के पानी के लिये जद्दोजहद कर रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जल संकट भविष्य में बड़ी समस्या होगी। उस...
View Articleपहाड़ी हुई हरी–भरी तो सात तालाब लबालब
लेखक: मनीष वैद्यकुछ गाँव के लोगों ने अपने पड़ोस की एक बंजर पहाड़ी को सहेजने की कोशिश की तो देखते ही देखते गाँवों के आस-पास सात तालाब और करीब 50 से ज़्यादा कुएँ पानी से लबालब हो उठे। ताज़ा–ताज़ा पानीदार हुए...
View Article1700 घरों के गाँव में 800 से ज़्यादा कुंडियाँ
लेखक: मनीष वैद्यक्या आपने कभी ऐसा गाँव देखा या सुना है, जिसके हर दो में से एक घर में पानी से लबालब कुंडियाँ हों। इस जल संकट के दौर में जब पूरे गाँवभर को पानी नसीब नहीं हो पा रहा हो ऐसे में यह पानीदार...
View Articleफतेहपुर में सूखे पर फतेह
Source: राइजिंग टू द काल, 2014 अनुवाद - संजय तिवारीकिसी सरकारी योजना में ऐसा पहली बार हुआ था कि दोहन की बजाय संवर्धन पर सरकारी धन खर्च किया गया था। सरकारें ट्यूबवेल बनाकर धरती का पानी खींचने में...
View Articleतालाब सँवरा तो गाँव के अच्छे दिन लौटे
लेखक: मनीष वैद्यग्रामीणों द्वारा डेढ़ महीने की मेहनत से तालाब का आकार खुलने लगा और 10 फीट तक गहरीकरण भी हुआ। तय हुआ कि अब कोई कचरा नहीं फेंकेगा। बारिश का पानी मोतियों की तरह तालाब में समाने लगा। बारिश...
View Articleएक अनूठी अन्तिम इच्छा
लेखक: क्रांति चतुर्वेदीलव तालाब में डेढ़ हेक्टेयर के क्षेत्र में पानी भरा है। इस रमणीक संरचना के आस-पास के किसानों ने गर्मियों में सब्जी की फसल सहित तीन-तीन फसलें ली हैं। यहाँ अब गर्मी में भी ट्यूबवेल...
View Articleसौ से ज्यादा कुओं वाला गाँव - कैलोद
लेखक: मनीष वैद्यबीते साल करीब 65 फीसदी कुओं के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। वहीं इससे उलट कैलोद में अब भी करीब सवा सौ से ज्यादा कुएँ पानी से लबालब हैं। इनमें कई कुएँ डेढ़ सौ से पचास साल पुराने तक भी...
View Articleअब गाँव-गाँव ठाठे मार रहा नीला पानी
लेखक: मनीष वैद्यबीते सालों के मुकाबले इस साल यहाँ के तालाबों में 40 फीसदी से ज्यादा बरसाती पानी इकट्ठा हुआ और यह पानी अब काफी समय तक गाँव के लोगों के उपयोग में आ सकेगा। कुछ गाँवों में तो यह गर्मी के...
View Articleउफरैखाल के नौले-धारे से पानीदार समाज
Author: केदार दत्त 2200 मीटर की ऊँचाई पर स्थित उफरैखाल जैसे खूबसूरत स्थल के आसपास के नौले-धारे सूख चुके थे। ग्रामीणों को हलक तर करने को कई-कई किमी की दूरी पैदल नापकर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती थी।...
View Articleकल्दा पठार की पहाड़ियों में थमने लगा पानी
लेखक: मनीष वैद्यपानी की समस्या दूर करने के लिये दुर्गम पठारी क्षेत्र में पहाड़ों के बीच पानी को रोक पाना बहुत मुश्किल काम था लेकिन संस्था द्वारा किये गए तकनीकी और सामाजिक बदलाव के कामों से काफी कुछ बदल...
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